राजनांदगांव : जड़ों की ओर लौटने का संदेश, अक्ति पर काव्य गोष्ठी में संस्कारों की गूंज…
राजनांदगांव , लोक तिहार अक्ती (अक्षय तृतीया) के अवसर पर शहर में आयोजित काव्य गोष्ठी में अपनी जड़ों की ओर लौटने का सशक्त संदेश गूंजा। रिद्धि-सिद्धि कॉलोनी स्थित कवयित्री रेशमी साहू के निवास पर छत्तीसगढ़ साहित्य सृजन समिति की मासिक गोष्ठी में लोक संस्कृति, ग्राम्य जीवन और मानवीय मूल्यों से सराबोर रचनाओं ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि आत्माराम कोशा ने की, जबकि विशेष अतिथि के रूप में हास्य-व्यंग्य कवि पद्मलोचन शर्मा उपस्थित रहे।
मां सरस्वती वंदना से शुरू हुए आयोजन में कवियों ने बदलते सामाजिक परिवेश, प्रकृति के क्षरण और गिरते मानवीय मूल्यों पर अपनी रचनाओं के माध्यम से तीखा और संवेदनशील दृष्टिकोण रखा। गजलकार अनुराग सक्सेना ने प्रकृति के विनाश पर चिंता जताई, वहीं विरेंद्र तिवारी ने व्यवस्था की विसंगतियों पर व्यंग्य किया। कवयित्री रेशमी साहू ने बेटी जन्म की महत्ता को रेखांकित किया। कार्यक्रम में पप्पू कलिहारी और मानसिंह ने आधुनिक जीवनशैली से दूर पारंपरिक मूल्यों और प्रकृति संरक्षण की ओर लौटने का आह्वान किया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में आत्माराम कोशा ने ग्राम्य जीवन की सादगी और सौहार्द को रेखांकित करते हुए इसे समाज की असली ताकत बताया। वहीं मंच संचालन कर रहे थंगेश्वर कुमार साहू ने अध्यात्म और कर्म के महत्व को अपनी रचना के माध्यम से प्रस्तुत किया। गोष्ठी में सुषमा शुक्ला, अखिलेश्वर, रितिका साहू और डॉ. चंद्रशेखर शर्मा सहित कई कवियों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं। समापन पर व्याख्याता थंगेश्वर कुमार साहू को स्मृति चिन्ह व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। पूरा कार्यक्रम गरिमामय रहा।


